Thursday, 11 April 2013


      ज़माने के लिए

ये संग दिलों का शहर है 

चलना सम्हल के तुम

यहाँ पलकों पे बिठाते

है गिरने हे लिए

यहाँ कुछ रिश्ते जी रहे

 है लोग दुनिया मे

चाहिए उनको भी कुछ

लोग दिखाने के लिए

बिना जज़्बात वो निभा

रहे है रिश्तों को

उनको चाहिए ये रिश्ते

सिर्फ जमाने के लिए

जितेन्द्र मणि

 

 

                प्यार

अज़ब है दिल अज़ब है दिल की ये सियासत भी

 जो दिल दुखाए क्यों  उसी पे हमे प्यार आये

जिसकी यादो मे हम यूँ बेसबब से फिरते हों

बिना उस बैरी के दिल को नहीं  करार आये

बहुत  से लोग चले राहे ए इश्क पर लेकिन

जो जितनी डूबे वही इस नदी के पार आये

तमाम लोग तो खो ही गए अंधेरों मे

वो जो लौटे वो भी कितने बेक़रार आये

वो लाख ही करे यूँ मेरे प्यार को रुसवा

इसी पे या खुदा मुझको तो और प्यार आये

हमने ये जाँ ओ दिल निसार कर दिया उनको

लाख चाहे अब इनके होठों पर इनकार आये

जितेन्द्र मणि  

Tuesday, 9 April 2013


        प्रचार का असर

बिज़नेस गुरु के ऐड का फंडा तो देखिये

जबरन चलते चीजों का डंडा तो देखिये

कुछ अन्धो ने खरीद लिए नज़र के चश्मे

गंजे खरीदते है कंघी तेल देखिये

बहरे तमाम ले रहे है गीत के कसेट

है दम प्रचार मे ये बात मान लीजिए

अब तो कुआरे नैपकिन खरीद रहे है  

है छूट आज इतनी जरा ये तो देखिये

कुछ भी किसी को बेच दे ऐसा है हुनर ये

इनके असर से अब जरा बच कर तो देखिये  

जितेन्द्र मणि  

 

Wednesday, 3 April 2013


          कहाँ मिलते है

अब तो हर शहर मे कूचे मे गली मे देखो

हिंदू और सिक्ख ,मुसलमान यहाँ मिलते है

मगर ये देश का दुर्भाग्य देख लो यारो

लाल भारत के ये इंसान कहाँ मिलते है

घंटियाँ बज रही अज़ान हो रहे लेकिन

रात को रास्ते सुनसान यहाँ मिलते है

खूब मस्जिद है यहाँ मंदिरों का जमघट है

मगर खुदा कहाँ ,भगवान कहाँ मिलते है

जितेन्द्र मणि

             समर्पण

जितना भी जीवन का क्षण है

तुम्हे बस तुम्हे समर्पण है

मेरा जीवन अब तेरा है

तेरा बस तेरा दर्पण है

इस डाली के फल फूल सभी

तुझको बस तुझको अर्पण है

संग तेरे ही बस लग पाया

जीवन कितना आकर्षण है  
जितेन्द्र मणि

Sunday, 16 December 2012


आग पी कर पचाने को दिल चाहिए

 

ऐरा गैरा कोई नत्थू खैरा नही

अपना वादा निभाने को दिल चाहिए

इश्क का नाम तो यूं ही लेते सभी

इश्क मे चोट खाने को दिल चाहिए

सच का दमन पकड़ना है आसान नहीं

आग पी कर पचाने को दिल चाहिए

प्यार रिश्ते वफ़ा दोस्ती यारियां

इनको दिल से निभाने को दिल चाहिए

नाम सुकरात का जानते सब मगर

ज़हर हँस करके पीने को दिल चाहिए

झूट कहने मे सुनने मे अच्छा लगे

सच को सुनने सुनाने को दिल चाहिए

प्यार है तुमसे ये बात कहना सरल

जनम भर तक निभाने को दिल चाहिए

हौसला तुममे है मेरे जैसा नहीं

मुझसे आंखे मिलाने को दिल चाहिए    

Zahar hus kar key peenay ko dil chahiye
Jhooth Kahney mey sun ney mey achha lagey
Sach ko sun ney sunaaney ko dil chahiye
Pyaar karta huu kahnaa hai kitnaa saral
Janm bhar par nibhaneey ko dil chahiye

Zahar hus kar key peenay ko dil chahiye
Jhooth Kahney mey sun ney mey achha lagey
Sach ko sun ney sunaaney ko dil chahiye
Pyaar karta huu kahnaa hai kitnaa saral
Janm bhar par nibhaneey ko dil chahiye
जितेन्द्र मणि

अतिरिक्त उपायुक्त

पी सी आर

Thursday, 15 November 2012




तन्हाई उनके जाते ही पहलू मे आ गयी

खाबो मे खयालो मे इस क़दर से छा गयी

होने ना दिया एक पल भी तनहा फिर मुझे

तन्हाई संग थी ,नहीं तनहा किया मुझे

इतनी तो वफ़ा मुझसे तन्हाई निभा गयी

उनसे जियादा साथ मेरा ये निभा गयी

जितेन्द्र मणि

अतिरिक्त उपायुक्त

पी सी आर